सोमवार, 2 नवम्बर 2026
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दिल्ली की महारैली से ₹11 हजार करोड़ के नुकसान का दावा, हरियाणा के खरीदारों पर भी पड़ा असर

लेखक: न्यूज़ डेस्करिपोर्ट: अनन्या रस्तोगी

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दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA गठबंधन की महारैली के बाद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राजधानी के कारोबार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। दिल्ली के बाजारों में हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर समेत आसपास के शहरों से भी रोजाना हजारों ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।


दिल्ली की महारैली से ₹11 हजार करोड़ के नुकसान का दावा, हरियाणा के खरीदारों पर भी पड़ा असर
दिल्ली की महारैली से ₹11 हजार करोड़ के नुकसान का दावा, हरियाणा के खरीदारों पर भी पड़ा असर

नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA गठबंधन की महारैली का असर राजधानी के कारोबार पर पड़ने का दावा किया गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक, रैली और उससे जुड़े यातायात प्रतिबंधों के कारण दिल्ली के व्यापार को एक दिन में करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन का दावा है कि करीब 3 लाख दुकानों वाले प्रमुख बाजारों में से लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। इसका असर केवल दिल्ली के कारोबारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हरियाणा और आसपास के राज्यों से दिल्ली आने वाले खरीदारों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, दिल्ली के खुदरा और थोक कारोबार को करीब 8,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, नया बाजार, चावड़ी बाजार, अजमेरी गेट, दरियागंज, पहाड़गंज, भागीरथ पैलेस, कनॉट प्लेस और करोल बाग सहित कई बड़े बाजारों में कारोबार प्रभावित रहा।

संगठन का कहना है कि इन बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें हैं, जिनमें से लगभग 2.5 लाख बंद रहीं। CTI ने करीब 80 फीसदी व्यापारिक गतिविधियां ठप होने का अनुमान लगाया है।

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दिल्ली के बाजारों में हरियाणा से भी पहुंचते हैं खरीदार

इस नुकसान का एक महत्वपूर्ण पहलू दिल्ली और हरियाणा के बीच व्यापारिक आवाजाही है। CTI के मुताबिक, सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बहादुरगढ़ और झज्जर समेत आसपास के करीब 100 शहरों और कस्बों से रोजाना 3 से 4 लाख ग्राहक दिल्ली के बाजारों में खरीदारी के लिए आते हैं।

संगठन का दावा है कि रैली के दिन यातायात और आवाजाही में परेशानी की आशंका के कारण बड़ी संख्या में ग्राहक दिल्ली नहीं पहुंचे। ऐसे में दिल्ली के थोक बाजारों पर निर्भर आसपास के शहरों के खरीदारों और कारोबारियों की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। हालांकि, हरियाणा के कारोबार को कितना प्रत्यक्ष नुकसान हुआ, इसका अलग से कोई आंकड़ा CTI ने नहीं दिया है।

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ट्रांसपोर्ट और माल की सप्लाई भी प्रभावित होने का दावा

CTI ने ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को करीब 1,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में माल की लोडिंग और अनलोडिंग प्रभावित रही।

CTI का दावा है कि दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर समेत 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना करीब 5,000 ट्रक और टेंपो माल लेकर बाजारों तक पहुंचते हैं। वहीं, दिल्ली के बाजारों से करीब 3,000 वाहन NCR और देश के अन्य हिस्सों में सामान भेजते हैं। रैली के दिन इस आवाजाही में बाधा आई।

संगठन के मुताबिक, जेएलएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग और नेताजी सुभाष मार्ग पर करीब 15 से 20 हजार बसें, कारें और टेंपो फंसे रहे। इससे माल की ढुलाई और बाजारों तक सामान पहुंचाने का काम प्रभावित हुआ।

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होटल, पर्यटन और दिहाड़ी कामगारों पर भी असर

CTI ने होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन क्षेत्र को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया है। संगठन के अनुसार, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज, चांदनी चौक और दरियागंज के 2,000 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस और ढाबों की बुकिंग रद्द हुई। लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक जैसे पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित होने का दावा किया गया है।

इसका असर रोजाना कमाई पर निर्भर कामगारों पर भी पड़ा। CTI के मुताबिक, करीब 20 लाख कर्मचारियों, लोडर, ऑटो-ई-रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी वालों, पोर्टर और कुलियों की एक दिन की कमाई प्रभावित हुई। संगठन ने इस क्षेत्र के नुकसान का अनुमान करीब 200 करोड़ रुपये लगाया है।

दिवाली से पहले कारोबार प्रभावित होने पर उठे सवाल

यह नुकसान ऐसे समय होने का दावा किया गया है, जब दिल्ली के बाजार धनतेरस और दिवाली की खरीदारी की तैयारी कर रहे थे। इस साल धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली 8 नवंबर को है। त्योहारों से पहले का समय दिल्ली के थोक और खुदरा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

गौरतलब है कि रैली से पहले भी CTI ने कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए आयोजन को दिवाली के बाद कराने की मांग की थी। अब संगठन ने आयोजन के बाद करीब 11,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जारी किया है।

इस बीच, राहुल गांधी ने भी रैली के दौरान कनॉट प्लेस की दुकानों के बंद होने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राजधानी में दुकानें जबरन बंद कराई गईं। दूसरी ओर, CTI ने दुकानों के बंद रहने की वजह रैली के कारण यातायात बाधित होने और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने को बताया है।

CTI ने सवाल उठाया है कि व्यापारियों, फैक्ट्री मालिकों और दुकानदारों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा। हालांकि, 11,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा संगठन का अपना अनुमान है। नुकसान का कोई स्वतंत्र ऑडिट या सरकारी आकलन अभी सामने नहीं आया है।

रिपोर्ट: अनन्या रस्तोगी नई दिल्ली

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