
रेवाड़ी। एक नवंबर 1989 को जिले का दर्जा पाने वाले रेवाड़ी ने 37 साल का सफर पूरा कर लिया है। इस दौरान जिले में कई बदलाव हुए, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से गांव माजरा में बन रहा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) एक बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। संस्थान में MBBS की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। अब क्षेत्र के लोगों को यहां मरीजों के इलाज के लिए OPD सेवाएं शुरू होने का इंतजार है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिसंबर के अंत तक OPD शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक शुरुआत की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है।
एम्स शुरू होने से रेवाड़ी के साथ महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर और भिवानी जिलों के लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए भी यह संस्थान महत्वपूर्ण हो सकता है। अभी गंभीर बीमारियों और विशेषज्ञ इलाज के लिए कई मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। एम्स में सेवाएं शुरू होने के बाद इस निर्भरता में कमी आ सकती है।
50 MBBS सीटों से शुरू हुआ शैक्षणिक सत्र
हरियाणा सरकार ने विधानसभा में दी गई जानकारी में बताया था कि एम्स माजरा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 50 MBBS सीटों पर दाखिले को मंजूरी मिली है। परियोजना की मेडिकल कॉलेज क्षमता 100 सीट निर्धारित है। यानी फिलहाल स्वीकृत प्रवेश संख्या और संस्थान की प्रस्तावित कुल क्षमता अलग-अलग हैं।
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1,650 करोड़ रुपये की परियोजना, 750 बिस्तरों का प्रस्तावित अस्पताल
माजरा में एम्स की घोषणा फरवरी 2019 में हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी 2024 को इसकी आधारशिला रखी थी। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, परिसर करीब 210 एकड़ में फैला है और इसके लिए हरियाणा सरकार ने जमीन उपलब्ध कराई है।
केंद्र सरकार की आधारशिला संबंधी जानकारी के मुताबिक, परियोजना की लागत करीब 1,650 करोड़ रुपये है। इसके मूल प्रस्ताव में 750 बिस्तरों का अस्पताल, 100 सीटों का मेडिकल कॉलेज, 60 सीटों का नर्सिंग कॉलेज और 30 बिस्तरों वाला आयुष ब्लॉक शामिल है।
प्रस्तावित चिकित्सा सुविधाओं में हृदय रोग, गुर्दा रोग, तंत्रिका रोग, यूरोलॉजी, कैंसर उपचार और बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी जैसी विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा ICU, आपातकालीन एवं ट्रॉमा सेंटर, ऑपरेशन थिएटर, जांच प्रयोगशालाएं, ब्लड बैंक और फार्मेसी जैसी सुविधाओं की भी योजना है।
एम्स तक पहुंच आसान बनाने की भी तैयारी
संस्थान तक पहुंचने के लिए सड़क और रेलवे से जुड़ी कनेक्टिविटी भी अहम है। एम्स के पास रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-48 से सीधी पहुंच उपलब्ध कराने के लिए ट्रंपेट इंटरचेंज की योजना का भी उल्लेख किया गया है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य मरीजों, कर्मचारियों और एंबुलेंस की आवाजाही को आसान बनाना है। हालांकि, एम्स की चिकित्सा सेवाओं का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा, जब अस्पताल के साथ जरूरी सड़क संपर्क और अन्य सुविधाएं भी प्रभावी ढंग से तैयार होंगी।
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OPD शुरू होने के बाद बढ़ेगी क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधा
रेवाड़ी जिले के 37 साल के सफर में माजरा एम्स स्वास्थ्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उम्मीद है। MBBS की पढ़ाई शुरू होना इस परियोजना की दिशा में एक कदम है, लेकिन आम लोगों को इसका सीधा लाभ OPD और अस्पताल की अन्य चिकित्सा सेवाएं शुरू होने के बाद ही मिलेगा।
दिसंबर के अंत तक OPD शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन मरीजों को वास्तविक सेवाएं कब और किस व्यवस्था के तहत मिलेंगी, यह संस्थान की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगा। क्षेत्र के लोगों की नजर अब इसी अगले चरण पर है।
