
तिरुवनंतपुरम। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 3 नवंबर को केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के सभापतियों के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। दो दिवसीय इस सम्मेलन में सरकारी खर्च की निगरानी, वित्तीय जवाबदेही और सुशासन को मजबूत बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केरलम विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन और विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति के. एन. बालगोपाल भी शामिल होंगे। संसद की लोक लेखा समिति के सभापति के. सी. वेणुगोपाल स्वागत भाषण देंगे, जबकि विधानसभा की उपाध्यक्ष शानिमोल उस्मान धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करेंगी।
सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर होगी चर्चा
सम्मेलन का मुख्य विषय ‘लेखा परीक्षा, जवाबदेही एवं सुशासन – लोक लेखा समिति की उभरती भूमिका’ रखा गया है। इसमें संसद और विभिन्न राज्यों की लोक लेखा समितियों के सभापति तथा सदस्य हिस्सा लेंगे।
यह भी पढ़ेंबेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर शुरू, उद्यान एक्सप्रेस से करीब 6 घंटे कम होगा सफर
चर्चा के दौरान सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की निगरानी, सरकारी खर्च की जांच और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा समितियों के कामकाज से जुड़े अनुभव साझा किए जाएंगे और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने पर भी चर्चा होगी।
क्या करती है लोक लेखा समिति?
लोक लेखा समिति संसद और विधानमंडलों की महत्वपूर्ण समितियों में शामिल होती है। इसका प्रमुख काम सरकारी खर्च की जांच करना और यह देखना है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल विधायिका से मिली मंजूरी तथा निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार हुआ है या नहीं।
यह भी पढ़ेंदिल्ली में 570 अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोगों और दाताओं ने एक साथ किया ताड़ासन, बना रिकॉर्ड
यह समिति सरकारी विभागों के खर्च, लेखा परीक्षा से जुड़ी रिपोर्टों और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मामलों की समीक्षा करती है। इसके जरिए सरकारी कामकाज में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है।
4 नवंबर को होगा सम्मेलन का समापन
दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 4 नवंबर को होगा। समापन सत्र को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संबोधित करेंगे। इस दौरान केरलम विधानसभा अध्यक्ष और संसद की लोक लेखा समिति के सभापति भी अपने विचार रखेंगे।
सम्मेलन में लेखा परीक्षा के बदलते स्वरूप, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियों और विधायी समितियों की निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श होगा। इसका उद्देश्य लोक लेखा समितियों की भूमिका को मजबूत करना और सरकारी खर्च में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने के उपायों पर सहमति विकसित करना है।
यह भी पढ़ेंभारतीय नौसेना का पोत त्रिशूल ग्रीस पहुंचा, सूडा खाड़ी में यूनानी नौसेना के साथ बढ़ाएगा सहयोग
