
फरीदाबाद। बीके सिविल अस्पताल में महीनों से खड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर करीब 50 लाख रुपये का डीजल खरीदे जाने का मामला सामने आया है। जिन गाड़ियों के अस्पताल की मोर्चरी के पास और एजेंसी की वर्कशॉप में खड़े होने की जानकारी है, उनके फ्यूल कार्ड से लगातार डीजल भरवाने की एंट्रियां दर्ज मिली हैं। मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने 20 अक्टूबर को जांच कमेटी गठित की। कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले का दूसरा अहम पहलू अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था है। 22 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बीके अस्पताल की करीब 26 एंबुलेंस में से 11 सेवा से बाहर थीं। वहीं, 108 सेवा के तहत संचालित आठ एंबुलेंस में से केवल चार के चालू होने की जानकारी भी सामने आई है। अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज पहुंचते हैं और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है। ऐसे में एंबुलेंस की उपलब्धता मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।
चार एंबुलेंस खड़ी थीं, फिर भी फ्यूल कार्ड से होती रही खरीद
विभागीय जानकारी के मुताबिक, पंचकूला स्थित मुख्यालय ने एंबुलेंस के फ्यूल कार्ड से हुए लेनदेन की जांच की थी। इस दौरान ऐसी एंट्रियां सामने आईं जिनमें गाड़ियां लंबे समय से खड़ी थीं, लेकिन उनके नाम पर पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदा जा रहा था। चार एंबुलेंस के नाम पर करीब 50 लाख रुपये के ईंधन की खरीद का अंदेशा जताया गया है। यह रकम अभी जांच के दायरे में है, इसे प्रमाणित वित्तीय नुकसान या गबन नहीं माना जा सकता।
रिकॉर्ड के मुताबिक, HR38GV3491 और HR38GV9863 नंबर की दो एंबुलेंस तीन से चार महीने से अस्पताल की मोर्चरी के पास खड़ी थीं। इसके बावजूद 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से डीजल भरवाने की एंट्रियां दर्ज मिलीं।
इसी तरह HR38Z0951 और HR38GV1670 नंबर की दो अन्य एंबुलेंस जनवरी और अगस्त से एजेंसी की वर्कशॉप में खड़ी थीं। इनके फ्यूल कार्ड से भी क्रमशः 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक डीजल भरवाने का रिकॉर्ड मिला।
यह भी पढ़ेंपंजाब में BJP-अकाली दल गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, 60 सीटों की मांग से फंस सकता है पेंच
फ्लीट मैनेजर से मांगा गया पूरा हिसाब
डिप्टी सिविल सर्जन (एनएचएम) विनय गुप्ता ने 16 अक्टूबर को आरटीएस फ्लीट मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें प्रत्येक एंबुलेंस के हिसाब से डीजल भरवाने की तारीख, मात्रा, कीमत, पेट्रोल पंप और संबंधित कर्मचारियों के नाम सहित पूरा ब्योरा मांगा गया।
विभाग ने यह भी पूछा कि जब एंबुलेंस निर्धारित स्थान से नहीं हिलीं तो उनके फ्यूल कार्ड से डीजल की खरीद कैसे होती रही। नोटिस में लेनदेन की जानकारी और जिम्मेदार कर्मचारियों का विवरण देने के निर्देश दिए गए थे।
जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने 20 अक्टूबर को मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी को 15 दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ेंसंविधान दिवस पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र, युवाओं के लिए होगी युवा संसद
एनएचएम डायरेक्टर वीरेंद्र यादव ने भी मामले की जांच की पुष्टि की है। सोमवार को बीके अस्पताल के दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि जांच के लिए कमेटी बनाई गई है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दुष्यंत चौटाला ने भी उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने फेसबुक पर पोस्ट कर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि नायब सरकार में अजब खेल हो रहा है, जहां खड़ी एंबुलेंस 50 लाख रुपये का डीजल फूंक रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि प्रदेश में रोजाना ऐसी कितनी घटनाएं होती होंगी। चौटाला ने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि एंबुलेंस के खड़े होने की जानकारी होने के बावजूद उनके फ्यूल कार्ड से डीजल की खरीद किसने अधिकृत की? पेट्रोल पंपों से हुए भुगतान और फ्यूल कार्ड की एंट्रियों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया? क्या गाड़ियों की लॉगबुक, किलोमीटर रीडिंग और वर्कशॉप रिकॉर्ड का मिलान किया गया था?
इसके अलावा, चारों एंबुलेंस के नाम पर खरीदे गए डीजल की वास्तविक मात्रा, कीमत और भुगतान पाने वाले पेट्रोल पंपों की जानकारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। फिलहाल करीब 50 लाख रुपये के ईंधन की खरीद का मामला जांच के अधीन है। कमेटी की रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है और सरकारी धन के इस्तेमाल में कहां गड़बड़ी हुई।
