सोमवार, 2 नवम्बर 2026
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पंजाब में BJP-अकाली दल गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, 60 सीटों की मांग से फंस सकता है पेंच

लेखक: न्यूज़ डेस्करिपोर्ट: अतुल सक्सेना

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पंजाब के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के दोबारा गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि कुछ दिनों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों दलों के सामने चुनौती है।


पंजाब में BJP-अकाली दल गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, 60 सीटों की मांग से फंस सकता है पेंच
पंजाब में BJP-अकाली दल गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, 60 सीटों की मांग से फंस सकता है पेंच

चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में एनडीए की सरकार बनने के दावे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है। हालांकि, अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन को लेकर अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस सवाल पर कहा, “मैं कोई पंडित तो हूं नहीं। आपको थोड़े दिनों में पता चल जाएगा कि होना क्या है।”

चंडीगढ़ में पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुखबीर बादल से पूछा गया कि अमित शाह पंजाब में एनडीए की सरकार बनने की बात कर रहे हैं, जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का बयान दे चुके हैं। इस पर बादल ने गठबंधन की संभावनाओं को लेकर सस्पेंस बनाए रखा।

बादल ने कहा कि पंजाब में उनकी पार्टी की राजनीतिक लड़ाई कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से है। इनके अलावा जो भी दल पंजाब के हितों और अकाली दल की विचारधारा के साथ खड़े होंगे, उनके साथ सहयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज किया है।

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भाजपा का अकेले चुनाव लड़ने का रुख, गठबंधन में सीटों का पेंच

गठबंधन की चर्चा के बीच भाजपा की पंजाब इकाई का रुख अलग दिखाई दे रहा है। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों कह चुके हैं कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सिर्फ गठबंधन की सहमति ही नहीं, बल्कि सीटों के बंटवारे पर भी बातचीत अहम होगी।

द ट्रिब्यून की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अकाली दल से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि भाजपा पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से कम से कम 60 सीटें चाहती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन सीटों में शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के लिए करीब 10 सीटें भाजपा के चुनाव चिह्न पर दिए जाने की संभावना पर चर्चा है। इस गणित के अनुसार सुखबीर बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल के हिस्से में लगभग 57 सीटें आ सकती हैं। हालांकि, यह संभावित सीट बंटवारे की मीडिया रिपोर्ट है, किसी दल की आधिकारिक घोषणा नहीं।

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पहले दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा अलग था। गठबंधन के दौरान अकाली दल 94 और भाजपा 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। ऐसे में भाजपा की हिस्सेदारी बढ़ने की स्थिति में अकाली दल को अपनी पुरानी सीटों में बड़ी कटौती करनी पड़ सकती है।

2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बाद टूटा था गठबंधन

भाजपा और अकाली दल का गठबंधन करीब 24 साल पुराना था। सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। दोनों दलों ने गठबंधन के दौरान 1997, 2007 और 2012 में पंजाब में सरकार बनाई थी।

गठबंधन टूटने के बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े। इसका असर विधानसभा चुनावों के नतीजों में भी दिखाई दिया। 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 15 और भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं। वहीं 2022 के चुनाव में अकाली दल की सीटें घटकर 3 और भाजपा की 2 रह गईं।

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2024 के लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत में भाजपा आगे

2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा को 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि अकाली दल का वोट प्रतिशत 13.41 रहा। इसके बावजूद भाजपा एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल ने बठिंडा सीट पर जीत दर्ज की।

इन चुनावी आंकड़ों से दोनों दलों की अलग-अलग स्थिति सामने आती है। भाजपा का वोट प्रतिशत अकाली दल से अधिक रहा, जबकि अकाली दल के पास बठिंडा जैसी सीट पर जीत के साथ अपना पारंपरिक राजनीतिक आधार मौजूद है। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के वोट प्रतिशत की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।

गठबंधन पर फैसला दोनों दलों के लिए अहम

2027 के चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के सामने गठबंधन को लेकर कई सवाल हैं। भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन बढ़ाना चाहती है, जबकि अकाली दल के लिए अपनी पुरानी राजनीतिक ताकत और सीटों की हिस्सेदारी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

सुखबीर बादल के बयान से गठबंधन की संभावना खुली हुई है, लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का अकेले चुनाव लड़ने का रुख और सीटों के बंटवारे की चर्चा इस राह में चुनौतियां दिखाती है। फिलहाल दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में पंजाब की राजनीति में यह सवाल बना हुआ है कि 2027 का चुनाव दोनों दल साथ लड़ेंगे या अलग-अलग।

रिपोर्ट: अतुल सक्सेना चंडीगढ़

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