नई दिल्ली। सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में पहले से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आयोग ने 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ दिल्ली और आसपास के पांच जिलों के सरकारी व निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति रखने का आदेश दिया है। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था करनी होगी।
इस फैसले का असर हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत के अलावा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में भी रहेगा। वहीं, निर्माण गतिविधियों पर लगाई गई रोक पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लागू होगी। इसमें रेवाड़ी भी शामिल है।
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गुरुग्राम समेत हरियाणा के तीन जिलों में ऑफिस के लिए नए निर्देश
CAQM के 30 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में सरकारी और निजी कार्यालयों को अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति के साथ संचालित करना होगा। शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देनी होगी।
यह व्यवस्था 5 से 20 नवंबर तक लागू रहेगी। हालांकि, ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है, जहां काम की प्रकृति के कारण घर से काम करना संभव नहीं है।
हरियाणा के लिहाज से गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत के कार्यालयों को इस आदेश के अनुसार अपनी व्यवस्था करनी होगी। रेवाड़ी का नाम कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति वाले जिलों की सूची में नहीं है।
रेवाड़ी में भी बंद रहेंगे धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्य
निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल को प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानते हुए आयोग ने पूरे NCR में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई है।
इस दौरान खुले में होने वाले निर्माण और ध्वस्तीकरण के उन कार्यों को रोकना होगा, जिनसे धूल उड़ती है। इसका दायरा केवल बिल्डिंग निर्माण तक सीमित नहीं है। हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, पाइपलाइन और टेलीकम्युनिकेशन से जुड़े लीनियर पब्लिक प्रोजेक्ट्स भी इस प्रतिबंध के दायरे में रखे गए हैं।
रेवाड़ी जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में यहां भी निर्धारित अवधि में धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर यह रोक लागू होगी।
किन कामों को मिली है छूट?
आयोग ने कुछ जरूरी परियोजनाओं को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है, ताकि आम लोगों की आवश्यक सेवाएं और महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाएं प्रभावित न हों।
रेलवे और मेट्रो सेवाओं, हवाई अड्डों, इंटर स्टेट बस टर्मिनल, अस्पतालों, पानी की आपूर्ति और सैनिटेशन से जुड़े कार्यों को छूट दी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा से जुड़े जरूरी कार्यों और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को भी प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
इसलिए आदेश को सभी तरह के निर्माण कार्यों पर एक समान रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। छूट प्राप्त परियोजनाओं के लिए आदेश में तय शर्तें लागू रहेंगी।
नवंबर के शुरुआती दिनों में क्यों बढ़ता है प्रदूषण?
CAQM ने नवंबर 2018 से 2025 तक के दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। आयोग के अनुसार, इन वर्षों में नवंबर के शुरुआती और मध्य दिनों के दौरान दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर कई बार तेजी से बढ़ा और कुछ दिनों में हवा गंभीर तथा अति गंभीर श्रेणी तक पहुंची।
इसके पीछे स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण, फसल अवशेष और बायोमास जलने से निकलने वाला धुआं भी एक कारण है। सर्दियों की शुरुआत में हवा की रफ्तार कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति कमजोर पड़ने से प्रदूषण लंबे समय तक बना रह सकता है।
इसी मौसमी स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयोग ने प्रदूषण का स्तर गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय पहले से उपाय लागू करने का फैसला लिया है।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की होगी जिम्मेदारी
आयोग ने दिल्ली सरकार और NCR से जुड़े राज्यों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। संबंधित विभागों और एजेंसियों को अपने-अपने क्षेत्र में आदेश के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने की आशंका वाले समय में धूल और दूसरी प्रदूषणकारी गतिविधियों को कम करना है। आदेश 5 नवंबर से लागू होकर 20 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।
इस आदेश का असर गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत के दफ्तरों के साथ पूरे NCR के निर्माण क्षेत्र पर पड़ेगा। रेवाड़ी में भी निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को लेकर संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों को आयोग के निर्देशों का ध्यान रखना होगा।

